

🚨🚩 “हक या हक़ीक़त की जंग!” — आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का ऐलान: 7 मार्च तक फैसला नहीं तो 8 मार्च को लखनऊ कूच, सहारनपुर से उठी प्रदेशव्यापी आंदोलन की हुंकार 🚩🚨
सहारनपुर। दशकों से पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी रीढ़ बनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का धैर्य अब जवाब देता दिख रहा है। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ उ०प्र० तथा आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलनात्मक रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी सहारनपुर के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में साफ शब्दों में कहा गया है कि यदि 7 मार्च 2026 तक उनकी न्यायोचित मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 मार्च 2026, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लखनऊ कूच करने को मजबूर होंगी।
ज्ञापन में कहा गया है कि आंगनबाड़ी कर्मचारी केवल सहायिकाएँ नहीं बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारशिला हैं। गांव-गांव, बस्ती-बस्ती वे गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का पोषण, टीकाकरण, कुपोषण से लड़ाई, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और अनेक सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करती हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया गया और न ही सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी अधिकार। संगठन ने इसे “सेवा के बदले असमानता” करार दिया है।
सबसे प्रमुख मांग है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ नियमित वेतनमान, भविष्य निधि (PF), पेंशन, ग्रेच्युटी, महंगाई भत्ता (DA), सवेतन चिकित्सा अवकाश और अन्य वैधानिक लाभ सुनिश्चित किए जाएं। संगठन का कहना है कि सरकार की सबसे संवेदनशील योजनाओं को संभालने वाले कर्मियों को मानदेय आधारित अस्थायी ढांचे में रखना अन्यायपूर्ण है।
दूसरी अहम मांग सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की है। ज्ञापन में उल्लेख है कि कोरोना काल से अब तक सेवानिवृत्त कई कार्यकर्ताओं को पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिला, जो उनके साथ गंभीर अन्याय है। इसी के साथ सहायिका से कार्यकर्ता और कार्यकर्ता से मुख्य सेविका पद पर योग्यता व वरिष्ठता आधारित नियमित पदोन्नति सुनिश्चित करने तथा पदोन्नति में आयु सीमा की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई गई है।
तकनीकी कार्यों के बढ़ते बोझ को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने नाराज़गी जताई है। पोषण ट्रैकर और अन्य ऑनलाइन कार्यों के लिए न तो उच्च गुणवत्ता के उपकरण दिए गए हैं और न ही इंटरनेट सुविधा। इसलिए ज्ञापन में ₹20,000 की मोबाइल खरीद सहायता और ₹2,500 मासिक डाटा/रिचार्ज भत्ता देने की मांग की गई है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह सुविधा नहीं दी गई तो अप्रैल 2026 से पोषण ट्रैकर व अन्य ऑनलाइन कार्य बंद कर दिए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इसके अलावा ₹1500 प्रोत्साहन राशि (PLI) के भुगतान में कथित अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया गया है। मांग है कि इसे नियमित मानदेय में जोड़ा जाए ताकि हर कर्मचारी को इसका लाभ मिल सके। किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया सीधे भवन स्वामी के खाते में देने, सभी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और निजीकरण/आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह बंद करने की भी मांग प्रमुख है।
कार्यकर्ताओं ने 365 दिन गुणवत्तापूर्ण पोषाहार वितरण की स्थायी व पारदर्शी व्यवस्था, बीएलओ व अन्य गैर-विभागीय कार्यों से मुक्ति, मनमानी मानदेय कटौती और सेवा समाप्ति पर रोक लगाने की भी मांग की है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है, जिसे तत्काल रोका जाए। सभी सरकारी बैठकों में भागीदारी के लिए टीए/डीए देने की भी मांग रखी गई है।
संघ की जिला अध्यक्ष सुलेलता पंवार सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर शासन से सहानुभूतिपूर्वक और त्वरित निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी टकराव की नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य की है। अब नजर सरकार के अगले कदम पर है—क्या वर्षों से लंबित इन मांगों का समाधान निकलेगा या प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर बड़ा जनांदोलन खड़ा करेंगी।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | ब्यूरो चीफ – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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